संस्‍कृतशब्‍दकोशः

संस्‍कृत हिन्‍दी आंग्‍ल शब्‍दकोशः


शब्‍दकोशः / संस्‍कृतहिन्‍दीआंग्‍लकोशः / पुद्गलजीववाद

पुद्गलजीववाद

जैनियों का मत जिसके अनुसार केवल प्राणी ही नहीं अपितु सभी वस्तुएँ सजीव हैं

the doctrine of the jainas that not only living being but also the elements are endowed with soul

विवरणम् : जैनियों का यह मत कि न केवल प्राणी और वनस्पति अपितु पृथ्वी‚ अग्नि‚ जल एवं वायु और इन भूतों के छोटे से छोटे कण भी सजीव हैं; पुद्गल वर्ण‚ रस‚ गन्ध और स्पर्श से युक्त होता है । यह नित्य है और अणुमय है । इसके अणुओं से अनुभव की सब वस्तुएँ बनी हैं‚ जिनमें प्राणियों के शरीर‚ ज्ञानेनन्द्रियाँ और मनस् भी हैं । सूक्ष्म अवस्था में रहने वाला पुद्गल ही कर्म है जो जीव के अन्दर प्रविष्ट होकर संसार का कारण बनता है ।

शब्‍दभेदः : पुं.
वर्गः :
दृश्यम् : 183

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